बरसाना: राधा रानी जी का जन्मोत्सव मधाम से मनाया गया, राधा रानी ने पहने 50 लाख के गहने, 11 क्विंटल पंचामृत से किया गया अभिषेक, बरसाना पहुचे 15 लाख श्रद्धालु।

राधा रानी जी का जन्मोत्सव मधाम से मनाया गया

उत्तर प्रदेश के मथुरा के बरसाना में राधा रानी जी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के राधारानी के प्राकट्य अभिषेक के बाद दर्शन कर भक्त आह्लालादित हो उठे। पूरा मंदिर राधारानी के जयकारों से गूंज उठा। यहां मंगलवार शाम से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था. ब्रज में जिस भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, उसी तरह सभी ब्रजवासी राधा रानी का जन्मोत्सव भी बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं . राधा रानी ने इस अवसर पर 50 लाख के गहने पहनाए गए और 11 क्विंटल पंचामृत से अभिषेक किया गया. वृंदावन और बरसाना दोनों जगह करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु श्यामा जू के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचे.

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 हर साल भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाया जाता है। वहीं भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। राधा रानी का जन्मोत्सव भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है। इस दिन लोग राधा रानी की पूजा अर्चना कर उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। वैसे तो राधा रानी का जन्मोत्सव पूरे विश्व में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है लेकिन बरसाने का आज के दिन अलग ही नजारा देखने को मिलता है.बुधवार सुबह 4:30 बजे मंदिर में मंगला आरती के साथ राधे-राधे के जयघोष करते हुए भक्तों ने अपनी आराध्या के दर्शन किए।

राधा रानी के जन्मोत्सव की तीन जगह सबसे ज्यादा धूम होती है. बरसाना में राधा रानी का दरबार है, जहां मुख्य आयोजन किया जाता है. रावल में राधा रानी प्रकट हुई थीं और वृंदावन में उन्होंने रास रचाया था. इसी कारण तीनों स्थानों पर अधिक धूम रहती है.

ब्रह्म मुहूर्त में पहले मूल शांति पूजा की गई, मूल शांति पूजन के बाद लाडली जी राधा रानी के श्री विग्रह को जगमोहन गर्भग्रह के आगे का हिस्सा में लाया गया जहां वैदिक मन्त्रों के साथ राधा रानी का 27 कुओ के जल ब्रज के 27 स्थानो की राज 27 वृक्ष के पत्तों और 108 तरह की जड़ी बूटियां से मिश्रित जल से अभिषेक किया गया. इसके बाद लाड़ली जी का 11 कुंतल पंचामृत से महाभिषेक किया गया.

मंदिर के पुजारी ने 11 घडो में दूध, दही, घी, शहद, बूरा, केसर, जटामसी, चंदन चूरा, पंच मेवा, गुलाब जल, इत्र आदि मिश्रित पंचामृत से महाभिषेक किया. जिनमें से एक में 27 छेद थे. महाभिषेक के बाद राधारानी का श्रृंगार किया गया और 50 लाख से ज्यादा कीमत के आभूषण पहनाए गए. इस मौके पर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा पड़ा.

महाभिषेक के बाद राधा रानी को मथुरा और फर्रूखाबाद के कारीगरों द्वारा तैयार रेशम के धागे से जरी और जरदोजी के काम की हुई पीले रंग की पोशाक पहनाई गयी इसके साथ ही उनको 50 लाख रूपए से ज्यादा कीमत के आभूषण पहनाए गए. बुधवार सुबह 4:30 बजे मंगला आरती, 5 बजे जन्मोत्सव दर्शन और 5:30 से 6:30 बजे तक महाभिषेक संपन्न हुआ. सुबह 7 से 9 बजे तक गौड़ीय समाज द्वारा श्रृंगार दर्शन हुआ, और दोपहर 12 बजे प्रसाद वितरण किया गया.

मंदिर में घंटे-घड़ियाल बज उठे और राधारानी के जयकारे गूंज उठे। महाभिषेक के बाद ठकुरानी के दर्शन हुए तो पूरा मंदिर जयकारों से गूंज उठा। सभी राधारानी की झलक पाने को आतुर दिखे। महावन गोड़िया मठ द्वारा परंपरागत चाव एवं बधाई गायन किया गया।

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