आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को मथुरा-वृंदावन में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया गया। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और इस्कॉन मंदिर से रथयात्रा निकाली गई, वहीं वृंदावन के जगन्नाथ मंदिर, मदन मोहन मंदिर और गोपीनाथ मंदिर से भी यात्रा संपन्न हुई।श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर जैसे ही निकले, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि, जयघोष और नृत्य करते श्रद्धालुओं के साथ 5 किलोमीटर लंबी यात्रा ने शहर को जगन्नाथमय कर दिया।यात्रा डीग गेट, मंडी रामदास, चौक बाजार, द्वारिकाधीश मंदिर, विश्राम घाट होते हुए जन्मस्थान मंदिर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इस्कॉन द्वारा निकाली गई रथयात्रा में देसी और विदेशी भक्तों की भागीदारी देखने को मिली। पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन के बाद रथयात्रा शुरू हुई, जिसमें भक्त रथ खींचते और झाड़ू लगाते हुए आगे बढ़ते नजर आए। श्रद्धा, समर्पण और उत्साह के साथ रथयात्रा संपन्न हुई।
जय जगन्नाथ! भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के पावन अवसर पर मथुरा-वृंदावन की पावन धरती आज जगन्नाथमय हो गई है। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण रथयात्रा उत्सव पूरे क्षेत्र में उल्लासपूर्वक मनाया गया।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के पावन अवसर पर मथुरा-वृंदावन की गलियाँ भगवान जगन्नाथ की भक्ति में रंग गईं। पूरे क्षेत्र में रथयात्रा उत्सव धूमधाम, आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर और इस्कॉन मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली गई। वहीं वृंदावन के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर, मदन मोहन मंदिर और गोपीनाथ मंदिर से भी पारंपरिक रथयात्रा आयोजित हुई।
जैसे ही भगवान रथ पर विराजमान होकर मंदिरों से बाहर आए, भक्तों के जयघोष और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शुरू हुई 5 किलोमीटर लंबी यात्रा डीग गेट, मंडी रामदास, चौक बाजार, स्वामी घाट, द्वारिकाधीश मंदिर, विश्राम घाट, होली गेट और भरतपुर गेट से होकर पुनः मंदिर पहुंची। रथ के साथ नाचते-गाते भक्तों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।
इसी क्रम में इस्कॉन द्वारा भी भव्य रथयात्रा निकाली गई, जो राधा ऑर्किड कॉलोनी से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा से पहले विधिवत पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन किया गया। इस यात्रा की खास बात रही कि देसी ही नहीं, विदेशी भक्तों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। भक्त रथ के आगे झाड़ू लगाते और भगवान के दर्शन करते भावविभोर नजर आए। चारों ओर भक्ति, उल्लास और श्रद्धा की अनूठी छवि देखने को मिली।





