पूर्व DGP प्रशांत कुमार पहुंचे वृंदावन, संत प्रेमानंद महाराज से ली आध्यात्मिक सीख

पूर्व DGP प्रशांत कुमार पहुंचे वृंदावन, संत प्रेमानंद महाराज से ली आध्यात्मिक सीख

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार गुरुवार को परिवार संग मथुरा पहुंचे, जहां उन्होंने वृंदावन के विभिन्न मंदिरों में दर्शन किए और केलि कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। उनके साथ पत्नी व वरिष्ठ IAS अधिकारी डिंपल वर्मा और बेटी भी मौजूद थीं। 2 मिनट 33 सेकेंड की इस भेंट में परिवार ने हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया और आध्यात्म पर चर्चा की। संत प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार की सेवा यात्रा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन के उत्तरार्ध में भगवान के स्मरण और आत्मिक साधना की सलाह दी। डिंपल वर्मा ने पारिवारिक जिम्मेदारियों का ज़िक्र किया, जिस पर संत ने कहा कि परिवार की सेवा भी ईश्वर भक्ति का ही एक रूप है। संत ने जीवन के अंतिम क्षणों में भगवान की स्मृति में रहने को ही मनुष्य जीवन की सिद्धि बताया।

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उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार गुरुवार को अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर मथुरा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वृंदावन के विभिन्न मंदिरों में दर्शन किए और केलि कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज से आत्मीय मुलाकात की।इस यात्रा में उनकी पत्नी, वरिष्ठ IAS अधिकारी डिंपल वर्मा और बेटी भी साथ रहीं। आश्रम में 2 मिनट 33 सेकेंड की इस भेंट के दौरान परिवार ने हाथ जोड़कर संत के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।

संत की सीख: जीवन का अंत भगवान की स्मृति में हो

संत प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार की सेवा यात्रा की प्रशंसा करते हुए कहा,आपने देश और समाज के लिए जो कार्य किए, वे अत्यंत सराहनीय हैं। अब समय है कि आप भगवान का स्मरण करें। ऐसे कर्म करें कि अगला जन्म भी मनुष्य के रूप में हो।

संत ने कहा,मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों में दुर्लभ है। अब जो समय है, उसमें ईश्वर का चिंतन करें – यही आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग है।

जब डिंपल वर्मा ने पारिवारिक जिम्मेदारियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्हें बेटी का विवाह भी करना है, तो संत ने जवाब में कहा-परिवार की सेवा भी परमात्मा की सेवा है। जब हम इसे भगवान की भक्ति मानकर करते हैं, तो वह भी साधना बन जाती है।

धार्मिक एकांत में भगवान का चिंतन करें: संत का संदेश

प्रेमानंद महाराज ने प्रशांत कुमार को संदेश दिया कि रिटायरमेंट के बाद का समय आत्मचिंतन, भक्ति और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।भगवान ने आपको सब कुछ दिया है। अब जितना समय मिल सके, एकांत में उनका चिंतन करें – यही जीवन की सच्ची सिद्धि है।

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