नवरात्रि 2025 दिन 9 की शुभकामनाएं : शारदीय नवरात्रि उत्सव में देवी दुर्गा की नौ दिवसीय पूजा 22 सितम्बर को शुरू हो चुकी है और 1 अक्टूबर 2024 तक चलेगी, वही 2 अक्टूबर को दशमी तिथि पर विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा।इस बार शारदीय नवरात्रि में तिथि की वृद्धि हो रही है, जिससे नवरात्र 9 की बजाय 10 दिन के होंगे। तिथि वृद्धि को शुभ माना जाता है, यह सुख-समृद्धि और सौभाग्य का संकेत देती है, जिससे माता के आशीर्वाद से सभी कार्य सफल होते हैं।
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वरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सिद्धियां और मोक्ष देती हैं। उनकी पूजा करने से सारे काम पूरे होते हैं। मोक्ष मिलता है।आध्यात्मिक गुरु पंडित कमला पति त्रिपाठी प्रमोद ने कहा कि नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का खास महत्व है। मां कमल के फूल पर बैठती हैं। उनकी पूजा में नौ तरह के फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। उन्हें विद्या और कला की देवी सरस्वती का रूप भी माना जाता है।
आज के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। भक्तजन नौ कन्याओं को देवी के नौ रूप मानकर उनका पूजन करते हैं और भोजन कराते हैं।मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों के समस्त दुखों का नाश करती हैं और उन्हें सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि महाष्टमी का दिन श्रद्धा, भक्ति और विशेष पूजन विधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
आश्विन मास की नवमी तिथि नवरात्रि का आखिरी दिन होता है और इस दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है. यदि आप पूरी नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा या व्रत न कर पाएं हों तो आपको इस दिन आप शक्ति की साधना करके माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री की पूजा कष्ट और बाधाओं को दूर करके सभी काम को सिद्ध करने वाली मानी गई है.
पूजा विधि
मां को कमल का फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें और उनकी पूजा करें।
मंत्र
मां की आरती करें और दुर्गासप्तशती या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
मां सिद्धिदात्री के मंत्र “ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः” का जाप करें।
भोग
हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा में भोग का बहुत ज्यादा महत्व होता है. ऐसे में नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धदात्री को उनका प्रिय भोग यानि हलवा, पूड़ी, चना आदि लगाना चाहिए.
मां सिद्धिदात्री की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री का प्राकट्य देवी-देवताओं के तेज से तब हुआ था, जब देवतागण महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे थे. इसके बाद देवताओं के तेज से मां सिद्धिदात्री प्रकट हुईं. मान्यता यह भी है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठिन साधना करके आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं. जिसके बाद उनका आधा शरीर देवी का हो गया था और उन्हें अर्धनारीश्वर के रूप में पूजा गया
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
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