नवरात्रि 2026 दिन 4 की शुभकामनाएं : 22 मार्च, यानी आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है।माता कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। देवी दुर्गा की नौ दिवसीय पूजा गुरुवार, 19 मार्च को शुरू हो चुकी है और 27 मार्च 2026 तक चलेगी.
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देवी अपने हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, चक्र, गदा, कमल-पुष्प, अमृत कलश और जप माला धारण करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी एक हल्की मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। उस समय चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, जिसे देवी के दिव्य तेज ने प्रकाश से भर दिया।कहा जाता है कि माता कूष्मांडा में सूर्य के समान तेज और ऊर्जा विद्यमान है। उनकी विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को शक्ति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
माता कूष्मांडा की पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करें। इसके बाद मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। देवी को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल फूल, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें। विशेष रूप से मालपुआ या मीठे भोग का प्रसाद चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें।इस तरह श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से मां कूष्मांडा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। माता के आशीर्वाद से सभी कार्य सफल होते हैं।
पहले, दूसरे दिन मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी,माँ चंद्रघंटा की पूजा करने के बाद, नवरात्रि के चौथे दिन, हम मां कूष्मांडा की आराधना करते है।
मां कूष्मांडा का प्रिय रंग
इस दिन पीला (Yellow) रंग बहुत शुभ माना जाता है, जो ऊर्जा और खुशी का प्रतीक है.
मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व
मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा से भक्तों के सभी तरह के रोग, कष्ट और शोक दूर होते हैं और जीवन में यश-कीर्ति मिलती है.
यहां जाने मां का नाम कूष्मांडा क्यों पड़ा?
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जब सृष्टि की शुरुआत हुई, तब चारों ओर घनघोर अंधकार था। मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से इस अंधकार को दूर कर ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है. कूष्मांड’ का अर्थ है – हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की सृजना करने वाली।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां कूष्मांडा में सूर्य के तेज और गर्मी को सहने की अपार शक्ति है। इसलिए उन्हें ऊर्जा की देवी भी माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से उनकी पूजा करता है, उसे मानसिक और शारीरिक बल के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा की भी प्राप्ति होती है।
मां कूष्मांडा का भोग
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी को पीले रंग का केसर मिला पेठा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तगण इस खास अवसर पर सफेद पेठे का फल भी मां को चढ़ाते हैं। इसके अलावा, पारंपरिक रूप से मालपुआ और बताशे भी मां कूष्मांडा को भोग स्वरूप अर्पित किए जाते हैं।
नवरात्रि 2026: माँ कूष्मांडा की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब त्रिदेव ने सृष्टि की रचना करने की कल्पना की, तो उस समय ब्रह्मांड में अंधेरा छाया हुआ था। इस दौरान ब्रह्मांड में सन्नाटा पसरा हुआ था। ऐसे में त्रिदेव ने मां दुर्गा से सहायता ली। मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा ने ब्रह्मांड की रचना की। मां कूष्मांडा के मुख मंडल पर मुस्कान से पूरा ब्रह्मांड में उजाला हो गया। इसी वजह से मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा कहा गया। सनातन शास्त्रों के अनुसार, सूर्य लोक में मां कूष्मांडा वास करती हैं। मां कूष्मांडा मुखमंडल पर सूर्य प्रकाशवान है।
नवरात्रि 2026 दिन 4 : इन मंत्र का करें जाप (मां कूष्मांडा के मंत्र)
मां कुष्मांडा का पूजा मंत्र : ऊं कुष्माण्डायै नम:
बीज मंत्र: कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:
ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
॥ मां कूष्मांडा की आरती सम्पूर्ण ॥
मा भगवती के नौ ( नवरात्रि ) स्वरूपों की महत्वपूर्ण तिथियां व निरूपण

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