सावन पुत्रदा एकादशी का पावन व्रत आज रखा जा रहा है. यह व्रत हर वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है, जो भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत संतान सुख, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्रत खासकर उन दंपतियों के लिए विशेष फलदायी है, जो संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं.
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सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सावन पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत आज, 5 अगस्त, मंगलवार यानी आज रखा जा रहा है। मान्यता है कि यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर और श्रद्धा पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से पापों से मुक्ति मिलती है और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत भी रखा जा रहा है, जो विशेष रूप से विवाहित और अविवाहित महिलाओं द्वारा सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।आइए जानते हैं सावन पुत्रदा एकादशी का महत्व, पूजा विधि, पूजन मुहूर्त
सावन पुत्रदा एकादशी 2025 पूजन मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त: 12:01 पी एम से 12:54 पी एम
रवि योग: 05:46 ए एम से 11:23 ए एम
इन शुभ मुहूर्त में आप सावन पुत्रदा एकादशी का पूजा अर्चना कर सकते हैं.
सावन पुत्रदा एकादशी महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पुत्रदा एकादशी व्रत का पालन करने से संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और पापों से मुक्ति प्राप्त होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन सावन माह में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह भगवान शिव, भगवान नारायण और माता लक्ष्मी तीनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।व्रत के दौरान श्रद्धालु उपवास, पूजा-अर्चना और रात्रि जागरण करते हैं। साथ ही, दान-पुण्य और भक्ति भाव से किए गए कार्य इस दिन के पुण्य को कई गुना बढ़ा देते हैं। मान्यता है कि यह दिन जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मकता लाने वाला होता है।सावन पुत्रदा एकादशी को शिवभक्तों के लिए भगवान की कृपा पाने का अंतिम विशेष अवसर भी माना जाता है, क्योंकि यह सावन मास की अंतिम एकादशी होती है।
व्रत की पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- पूजन सामग्री- पीला वस्त्र, पीला चंदन, तुलसी दल, फल, पंचामृत, दीपक, धूप, पंचमेवा आदि।
- श्रीहरि विष्णु को पीले पुष्प, पीले फल और तुलसी दल अर्पित करें।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का जप करें।
- श्रद्धा से पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- संध्या समय दीप जलाकर भगवान का भजन-कीर्तन करें।
- रात में जागरण करें। यह व्रत को पूर्णता और विशेष पुण्य प्रदान करता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
पुत्रदा एकादशी से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा द्वापर युग की है। कहा जाता है कि महिष्मति नगरी के राजा महीजित नहीं था और इस कारण अत्यंत दुखी रहते थे। धर्मपूर्वक राज्य चलाने और प्रजा की सेवा करने के बावजूद उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हो रहा था।
राजा के इस दुख का कारण जानने के लिए उनके मंत्री और प्रजा प्रतिनिधि वन में पहुंचे, जहां उन्हें महान तपस्वी लोमश ऋषि के दर्शन हुए। ऋषि ने तपबल से राजा के पूर्व जन्म का रहस्य बताया.राजा पिछले जन्म में एक निर्धन वैश्य था जिसने एकादशी के दिन जल पीने के लिए एक प्यासी गाय को हटा दिया था। इसी पाप के कारण उसे इस जन्म में पुत्र वियोग सहना पड़ रहा था।
इस दुख से मुक्ति के उपाय के रूप में लोमश ऋषि ने श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने और रात्रि जागरण का परामर्श दिया। व्रत के प्रभाव से राजा को तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई।इसलिए, पुत्रदा एकादशी व्रत को संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
विष्णुजी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे॥ ॐ जय
जो ध्यावे फल पावे
दुख विनसे मन का
स्वामी दुख विनसे मन का
सुख संपत्ति घर आवे
सुख संपत्ति घर आवे
कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय
मात-पिता तुम मेरे
शरण गहूं मैं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा
आस करूं मैं जिसकी॥ ॐ जय
तुम पूरण परमात्मा
तुम अंतर्यामी
स्वामी तुम अंतर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय
तुम करुणा के सागर
तुम पालक मेरे
स्वामी तुम पालक मेरे
मैं मूरख खल कामी
मैं सेवा करूं तेरी॥ ॐ जय
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे॥ ॐ जय
सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय
एकादशी तिथि 04 अगस्त को सुबह 11 बजकर 41 मिनट पर प्रारंभ होगी और 05 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। सावन पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 06 अगस्त को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त 06 अगस्त को सुबह 05 बजकर 45 मिनट से सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।





