हर साल कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन खरीदारी करने का विशेष महत्व होता है। दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ होता है, क्योंकि माना जाता है कि ऐसा करने से साल भर घर में बरकत बनी रहती है। यह पर्व आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर को समर्पित है, तो आइए जानते हैं कि धनतेरस पर आज कितने से कितने बजे तक खरीदारी का मुहूर्त रहेगा और पूजन का मुहूर्त रहेगा.
आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। इसी के साथ दीपावली महापर्व की औपचारिक शुरुआत भी हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान आज ही के दिन मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, जो अपने साथ धन, वैभव और समृद्धि लेकर आई थीं। उनके साथ भगवान कुबेर भी प्रकट हुए, जो देवताओं के कोषाध्यक्ष माने जाते हैं। इसी कारण इस दिन को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ खरीदारी, चाहे वह सोना, चांदी, बर्तन हो या नया वाहन साल भर सौभाग्य और समृद्धि लाता है.
धनतेरस पर खरीददारी का शुभ मुहूर्त (Sona-Chandi Kharidne Ka Samay)
धनतेरस के दिन सोना-चांदी खरीदना के लिए सबसे अच्छा समय अमृत काल माना जा रहा है, जो सुबह 08 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सोना-चांदी खरीदने से धन में अपार वृद्धि होती है। उसके बाद दूसरा मुहूर्त आज सुबह 11 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और तीसरा मुहूर्त आज शाम 7 बजकर 16 मिनट से रात 8 बडकर 20 मिनट तक रहेगा.
यम का दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन सूर्यास्त होने के बाद घर के मुख्य द्वार पर चार मुखी यम दीपक जलाया जाता है. जो कि यम देवता के लिए प्रज्वलित किया जाता है. इस अनुष्ठान को यम दीपक और दीपदान भी कहा जाता है, जो कि परिवार की सुख-शांति के लिए जलाया जाता है. आज यम दीपक जलाने का मुहूर्त शाम 5 बजकर 48 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 16 मिनट की रहेगी.
पूजन मुहूर्त (Dhanteras 2025 Puja Muhurat)
धनतेरस के दिन पूजन के लिए शुभ मुहूर्त प्रदोष काल यानी 07 बजकर 16 मिनट से लेकर 08 बजकर 20 मिनट तक है। इस दौरान आप भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
धनतेरस की पूजा विधि (Dhanteras 2025 Puja Vidhi)
- घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- रंगोली बनाएं और दीपक जलाएं।
- पूजा स्थान पर भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प लें।
- सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें।
- फिर देवी लक्ष्मी, कुबेर जी और धन्वंतरि जी को फल, फूल, मिठाई, हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
- इस दिन खरीदी गई नई वस्तु को भी पूजा में रखें और उनकी पूजा करें।
- अंत में आरती करके शंखनाद करें।
- शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, सरसों के तेल का चार मुख वाला यम दीपक जलाएं।
- अपने घर के कोने-कोने को रोशन करें।
ज्योतिषियों के अनुसार, धनतेरस के दिन खरीदारी करने से घर में सकारात्मता का वास होता है. तो चलिए जानते हैं इस दिन क्या चीजें खरीदनी चाहिए-
धनतेरस पर खरीदारी से आएगी खुशहाली, जानिए क्या-क्या खरीदना होता है शुभ
धनतेरस का पर्व सिर्फ खरीदारी का ही नहीं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि को आमंत्रित करने का विशेष दिन भी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई सही और शुभ वस्तुओं की खरीदारी पूरे वर्ष आपके जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आती है।
तो आइए जानते हैं कि धनतेरस पर किन वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है:
सोना और चांदी
धनतेरस के दिन सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदने की परंपरा सबसे पुरानी और शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
बर्तन
तांबे और पीतल के बर्तन इस दिन खरीदना अत्यंत शुभ होता है। ध्यान रहे कि बर्तन खरीदते समय उन्हें खाली न लें, उसमें कुछ सिक्के या अनाज डालकर घर लाना शुभ फलदायक माना जाता है।
झाड़ू
आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और धन की हानि रुकती है।
अन्य शुभ वस्तुएं
इसके अलावा इस दिन स्टील के बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, या घर की जरूरत का कोई भी नया सामान खरीदना भी अच्छा माना जाता है.बशर्ते वह उपयोगी हो और शुभ भावना से खरीदा गया हो.
पूजन मंत्र (Dhanteras 2025 Puja Mantra)
1. ॐ धन्वंतराये नमः॥
2. ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
3. अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
4. श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥
धनतेरस का महत्व
धनतेरस को लेकर आम धारणा है कि यह केवल सोना-चांदी और बर्तन खरीदने का दिन है, लेकिन वास्तव में यह पर्व धन्वंतरि त्रयोदशी के रूप में भी जाना जाता है. यानी भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान आज ही के दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक माना जाता है और वे मानवता को स्वास्थ्य और दीर्घायु का उपहार देने वाले देवता हैं।इस दिन लोग सिर्फ भौतिक सुख-समृद्धि की ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की भी कामना करते हैं। मंदिरों और घरों में भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा की जाती है, और स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं।
धनतेरस के दिन करें ये खास उपाय
धनतेरस की शाम को ‘धनवर्षा पोटली’ बनाना बेहद शुभ माना जाता है। यह पोटली मां लक्ष्मी की कृपा और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है। माना जाता है कि इसे घर में रखने से धन का प्रवाह, सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।पोटली में रखी जाती हैं शुभ सामग्री जैसे – हल्दी, चांदी का सिक्का, लक्ष्मी जी की तस्वीर, सुपारी, गोमती चक्र, कौड़ी, कमलगट्टे, इलायची, लौंग, अक्षत और धनिया। इन चीजों को पूजा के समय मां लक्ष्मी को अर्पित कर पोटली में रखा जाता है।इस पोटली को तिजोरी या पूजा स्थल में रखने से व्यापार, नौकरी और परिवारिक जीवन में लाभ मिलने की मान्यता है।





