जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी का परिवार गुरूवार को वृंदावन पहुंचे. जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाक़ात की। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशन्या भावुक हो उठीं और कहा, मेरे पति को मेरी आंखों के सामने मार दिया गया। वह दृश्य मुझे बार-बार याद आता है।
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परिवार के दुख को साझा करते हुए प्रेमानंद महाराज ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा, “भगवान की लीला और विधि का विधान तय होता है। शुभम का बलिदान पूर्व निर्धारित था।” उन्होंने समझाया कि मृत्यु को टाला नहीं जा सकता और इस सत्य को स्वीकार कर ही मन को शांति मिल सकती है।
संत ने परिवार को नाम-स्मरण और भक्ति में मन लगाने की सलाह दी, जिससे मानसिक संतुलन और आत्मबल बना रहे। उन्होंने कहा, पुत्र वियोग संसार का सबसे बड़ा दुख होता है। श्रीरामचरितमानस में भी इसका उल्लेख है।
शुभम के पिता संजय द्विवेदी, पत्नी ऐशन्या, चाचा पंडित मनोज द्विवेदी और अन्य परिजन इस दौरान मौजूद रहे। करीब 10 मिनट तक संत प्रेमानंद महाराज ने परिजनों से चर्चा की और उन्हें संबल प्रदान किया।
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