दीवाली के अगले दिन देशभर में गोवर्धन पूजा का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की इंद्र देव पर विजय की स्मृति में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।इस दिन श्रद्धालु गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसकी विधिपूर्वक पूजा करते हैं। इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर अन्न का महत्व समझाया जाता है।हालांकि अधिकमास या पंचांग की भिन्नता के कारण कभी-कभी गोवर्धन पूजा दीवाली के अगले दिन न होकर एक दिन बाद भी मनाई जाती है।
दीवाली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा इस वर्ष 22 अक्टूबर 2025 को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व प्रकृति की उपासना और भगवान कृष्ण की लीलाओं की स्मृति का प्रतीक है।ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की शुरुआत की थी ताकि लोगों को इंद्रदेव की पूजा के स्थान पर प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को समझाया जा सके। उसी परंपरा के तहत आज भी गाय की पूजा की जाती है, जिसे भारतीय समाज की रीढ़ माना जाता है।
यह पर्व सबसे पहले ब्रज क्षेत्र में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह गुजरात, राजस्थान सहित पूरे भारत में व्यापक रूप से मनाया जाता है। विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में इस दिन की भव्यता देखते ही बनती है।गोवर्धन पूजा को अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है। इस अवसर पर भगवान को छप्पन भोग यानी 56 प्रकार के व्यंजन जैसे दाल, चावल, सब्ज़ी, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं। यह भोग भक्तों की भगवान के प्रति कृतज्ञता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि जब इंद्रदेव ने गोकुलवासियों पर मूसलधार वर्षा कर उन्हें दंडित करना चाहा, तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी को सुरक्षित किया और इंद्र के अहंकार को शांत किया।गोवर्धन पूजा को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है और मंदिरों में भी तैयारियां जोरों पर हैं।
गोवर्धन पूजा की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत
पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 22 अक्टूबर को रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा.
गोवर्धन पूजा का पूजन मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा का पहला मुहूर्त 22 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 26 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इस दिन शाम की पूजा का मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा.
गोवर्धन पूजन विधि
गोवर्धन पूजा के पर्व पर देशभर में तैयारियां ज़ोरों पर हैं। इस खास मौके पर सुबह जल्दी उठकर घर और आंगन की साफ-सफाई करने की परंपरा है। इसके बाद श्रद्धालु गाय के गोबर या अनाज से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक रूप बनाते हैं।
पर्वत के चारों ओर बछड़े और ग्वालिन की मूर्तियां सजाई जाती हैं, और फिर दीपक, फूल, जल एवं अन्न अर्पित कर विधिवत पूजा की जाती है। पूजा के बाद गोवर्धन की परिक्रमा करने का विशेष महत्व है।इस दिन गाय और बछड़ों की पूजा भी अनिवार्य मानी जाती है। गायों को गुड़ खिलाया जाता है और चारा भी दिया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और बच्चों का व्यवहार भी सकारात्मक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग तनाव, चिंता या डिप्रेशन से जूझ रहे हैं, उनके लिए भी गौ-पूजा मानसिक शांति का माध्यम बन सकती है।पूजा के अंत में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में ब्राह्मणों, ज़रूरतमंदों और परिवार के सदस्यों में बांटने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे घर में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।साथ ही इस दिन दीपदान करने की भी परंपरा है, जिससे अंधकार दूर होता है और जीवन में खुशहाली का आगमन होता है।
गोवर्धन पूजा की पूजन सामग्री
- गाय का गोबर (गोवर्धन पर्वत बनाने के लिए)
- मिट्टी का कलश, जल और गंगाजल
- लाल-पीले रंग के वस्त्र और मोरपंख (गाय-बछड़े सजाने हेतु)
- शंख, घंटा, आरती थाली
- दीपक (घी या तेल का)
- धूप-बत्ती
- पुष्प (गेंदे, कमल या तुलसी)
- रोली, हल्दी, चावल (अक्षत)
- नैवेद्य (अन्नकूट प्रसाद)
- दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत हेतु)
- पान, सुपारी, लौंग, इलायची
- गौमाता की पूजा के लिए साफ जल और घास
- मिठाइयां
- मौसमी फल





