मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर अब विवाद गहराता जा रहा है। हिंदू नेता दिनेश फलाहारी ने रामभद्राचार्य की टिप्पणी को निंदनीय बताया है और कहा कि उन्हें अपने ज्ञान का अहंकार हो गया है.दरअसल, रामभद्राचार्य ने एक इंटरव्यू में प्रेमानंद महाराज को संस्कृत बोलने और श्लोक समझाने की खुली चुनौती भी दी थी। साथ ही प्रेमानंद की लोकप्रियता को क्षणिक और उन्हें बालक जैसा कहा था।इस पर पलटवार करते हुए दिनेश फलाहारी ने कहा कि प्रेमानंद महाराज ने करोड़ों सनातनियों को धर्म से जोड़ा, और वो खुद किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, फिर भी राधा नाम में ऐसे खो जाते हैं कि अपनी बीमारी को भी भूल जाते हैं।संत प्रेमानंद महाराज एक दिव्य संत हैं.
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मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज को लेकर दिए गए जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर अब संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। हिंदू नेता दिनेश फलाहारी ने रामभद्राचार्य की टिप्पणी को घोर निंदनीय बताते हुए कहा कि उन्हें अपने ज्ञान का घमंड हो गया है।
दरअसल, चित्रकूट के जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने हाल ही में एक साक्षात्कार में प्रेमानंद महाराज को न तो विद्वान माना और न ही चमत्कारी। उन्होंने प्रेमानंद को संस्कृत का एक अक्षर बोलने या किसी श्लोक का अर्थ बताने की चुनौती दी थी। साथ ही उनकी लोकप्रियता को क्षणभंगुर बताते हुए उन्हें बालक के समान भी कहा।
इस पर पलटवार करते हुए दिनेश फलाहारी ने कहा कि प्रेमानंद महाराज ने करोड़ों सनातनियों को धर्म से जोड़ा, वे पाखंड का विरोध करते हैं, संपत्ति से दूर रहते हैं, और गंभीर बीमारी के बावजूद राधा नाम में लीन रहते हैं।
फलाहारी ने कहा, ऐसे संत की निंदा करना सिर्फ व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे संत समाज और सनातन परंपरा का अपमान है।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रेमानंद महाराज का जीवन त्याग, भक्ति और सच्चे आध्यात्म का प्रतीक है।