हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। एकादशी तिथि हर महीने दो बार आती है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी माध्यम माना जाता है।मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखते हैं, उनके जाने-अनजाने में किए गए पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। इसलिए इस व्रत को विशेष फलदायी माना जाता है।पापमोचनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 15 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, जीवन में सुख, समृद्धि, धन और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी का विशेष महत्व है। माना जा रहा है कि इस शुभ तिथि का प्रभाव कुछ राशियों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के कारण इन राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।ऐसा कहा जा रहा है कि पापमोचनी एकादशी का यह व्रत कुछ लोगों के लिए भाग्य परिवर्तन का कारण बन सकता है। लंबे समय से चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं।
पापमोचनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च को सुबह 08:10 बजे से 15 मार्च को सुबह 09:16 बजे तक रहेगी। उदया तिथि को देखते हुए पापमोचनी एकादशी व्रत 15 मार्च यानी आज किया जा रहा है।
पापमोचनी एकादशी पूजन मुहूर्त
सुबह में 8 बजे से 9 बजकर 30 मिनट तक
सुबह में 9 बजकर 30 मिनट से 11 बजे तक
पापमोचनी एकादशी पूजा विधि
पापमोचनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद श्रद्धालु भगवान श्रीहरि का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को चंदन, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या भगवान के मंत्रों का जाप करना भी बेहद शुभ माना जाता है।
व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार करते हैं और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती और भजन-कीर्तन किया जाता है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को दान देना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी की रात जागरण कर भजन-कीर्तन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं अगले दिन द्वादशी तिथि में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
पापमोचनी एकादशी के उपाय
पापमोचनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि आज के दिन सूर्योदय के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए और उनके समक्ष घी का दीपक जलाना चाहिए। साथ ही विष्णु सहस्रनाम का तीन बार पाठ करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर अधिक कर्ज है या वह किसी बड़ी परेशानी से गुजर रहा है, तो पापमोचनी एकादशी की शाम को जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन केले, पीली दाल, धन, पीले वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार पीले रंग की वस्तुएं दान करने से समस्याओं से राहत मिलने की मान्यता है।
वहीं आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए भी इस दिन विशेष उपाय बताए जाते हैं। मान्यता है कि सायंकाल के समय भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर देसी घी का नौ बत्तियों वाला दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगती हैं।
पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा
धार्मिक मान्यता के अनुसार पापमोचनी एकादशी की कथा भगवान ब्रह्मा ने नारद मुनि को सुनाई थी। कथा के मुताबिक चित्ररथ वन में मेधावी ऋषि भगवान शिव की कठोर तपस्या कर रहे थे और ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे थे। उसी वन में मंजुघोषा नाम की एक अप्सरा आई और वीणा बजाकर गीत गाने लगी, जिससे ऋषि का ध्यान भंग हो गया। वे उसके मोह में पड़ गए और अपने तप का उद्देश्य भूल गए। कहा जाता है कि इस मोह में कई वर्ष बीत गए।
जब मंजुघोषा ने स्वर्ग लौटने की इच्छा जताई, तब मेधावी ऋषि को अपनी गलती का एहसास हुआ और क्रोधित होकर उन्होंने उसे पिशाचनी बनने का श्राप दे दिया। भयभीत मंजुघोषा ने श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा, तब ऋषि ने उसे चैत्र कृष्ण एकादशी यानी पापमोचनी एकादशी का व्रत कर भगवान विष्णु की पूजा करने का उपाय बताया।
मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी के दिन मंजुघोषा और मेधावी ऋषि दोनों ने विधिपूर्वक व्रत और पूजा की। भगवान विष्णु की कृपा से उनके पाप नष्ट हो गए और मंजुघोषा को श्राप से मुक्ति मिल गई। इसी वजह से कहा जाता है कि जो श्रद्धालु पापमोचनी एकादशी का व्रत करता है, उसके पापों का नाश होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु की जय… माता लक्ष्मी की जय…
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे।
भगवान विष्णु की जय… माता लक्ष्मी की जय…





