पंचांग के अनुसार आज, 30 दिसंबर को वर्ष की अंतिम पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस एकादशी का व्रत करने से संतान-सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस पावन दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।पौष मास की पुत्रदा एकादशी के अवसर पर आज कई शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं 30 दिसंबर का आज का पंचांग और इससे जुड़ी खास जानकारियां।
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हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होती है। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखते हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मान्यता है कि पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। इस व्रत के प्रभाव से न केवल संतान सुख मिलता है, बल्कि घर में समृद्धि और उन्नति भी आती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करते हैं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और रात्रि जागरण भी करते हैं।
आज यानी 30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। यह वर्ष 2025 की अंतिम एकादशी भी है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि आज सुबह 7 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है और दशमी तिथि भी इसके साथ चल रही है। यह व्रत 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे तक रहेगा।
इसी कारण कुछ श्रद्धालु आज 30 दिसंबर को व्रत रख रहे हैं, जबकि कुछ भक्त 31 दिसंबर को एकादशी व्रत करेंगे। जो लोग आज व्रत रखेंगे, वे कल भी एकादशी मानेंगे, वहीं 31 दिसंबर को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 1 जनवरी 2026 को पारण करेंगे।
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक
अमृत काल: 31 दिसंबर को रात्रि 11 बजकर 35 मिनट से प्रातः 01 बजकर 03 मिनट तक
पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा
एक नगर में सुकेतुमान नाम के राजा रहते थे, जिनकी पत्नी शैव्या थीं। संतान न होने के कारण दोनों हमेशा चिंतित रहते थे। राजा को इस बात का दुख था कि उनके बाद राज्य कौन संभालेगा और उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा। एक दिन जंगल भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि सभी पशु-पक्षी अपने परिवार के साथ सुखी जीवन जी रहे हैं, जिससे उनका मन और व्याकुल हो गया।
प्यास लगने पर राजा एक नदी किनारे स्थित ऋषि-मुनियों के आश्रम पहुंचे और सभी को प्रणाम किया। राजा के विनम्र स्वभाव से प्रसन्न होकर ऋषियों ने उनसे वरदान मांगने को कहा। तब राजा ने अपनी संतानहीनता का दुख प्रकट किया। ऋषियों ने बताया कि यह भगवान की कृपा है और उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
राजा ने श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत किया। कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुईं और उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। अंततः राजा को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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