महिलाएं आज संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए सकट चौथ का व्रत रख रही हैं। यह व्रत माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है, जिसे तिलकुटा चौथ और संकष्टी चौथ भी कहा जाता है। इस वर्ष सकट चौथ पर सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति और आयुष्मान जैसे तीन शुभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चतुर्थी तिथि 6 जनवरी सुबह 8:01 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। चंद्रमा की पूजा के महत्व को देखते हुए व्रत आज 6 जनवरी को रखा गया है। रात करीब 8:35 बजे चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा।
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आज सकट चौथ का पावन व्रत श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। यह पर्व देशभर में आस्था के साथ मनाया जाता है। व्रत के दौरान सकट चौथ की कथा सुनी जाती है और शाम को विधि-विधान से गणेश पूजा की जाती है। रात में चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है। भगवान गणेश को शकरकंद, मौसमी फल और तिल-गुड़ के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाता है। आइए जानते हैं सकट चौथ की तिथि और पूजन मुहूर्त।
सकट चौथ 2026 पूजा मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त: 12:06 पी एम से 12:48 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग: 07:15 ए एम से 12:17 पी एम
प्रदोष काल अवधि: 04:09 मिनट से लेकर 06: 39 मिनट
सकट चौथ 2026 पूजा विधि
सकट चौथ के अवसर पर व्रती सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले या स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेते हैं। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। शाम को विधि-विधान से गणेश पूजन के बाद चंद्र दर्शन कर दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।

संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराकर सिंदूर, दूर्वा, फूल, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। तिल-गुड़ के लड्डू, मोदक या तिलकुट का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ और व्रत कथा का विशेष महत्व है। चंद्रोदय के समय अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया जाता है।
सकट चौथ व्रत कथा
सकट चौथ व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का राज्य सुख-समृद्धि से भरा था। उसी राज्य में एक ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थीं, जो नियमित रूप से गणेश चौथ का व्रत करती थीं। एक दिन उनका पुत्र खेलते-खेलते भगवान गणेश की प्रतिमा लेकर बाहर चला गया, जहां एक दुष्ट कुम्हार ने टोटके के चलते बालक को आवा में डाल दिया।
जब बालक घर नहीं लौटा तो ब्राह्मणी ने पूरी रात भगवान गणेश से प्रार्थना की। सुबह चमत्कार देखने को मिला, बालक सुरक्षित मिला और आवा में जल भर आया। यह देखकर कुम्हार और राजा हरिश्चंद्र दोनों ही आश्चर्यचकित रह गए। ब्राह्मणी ने बताया कि यह चमत्कार किसी तप या विद्या से नहीं, बल्कि संकट गणेश चौथ के व्रत के प्रभाव से हुआ है।
मान्यता है कि सकट चौथ के दिन इस कथा का पाठ करने से सभी संकट दूर होते हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
भगवान श्री गणेश जी आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा.
जय गणेश…
दयावंत चार भुजा धारी.
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी.
जय गणेश…
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया.
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया.
जय गणेश…
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा.
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा.
जय गणेश…
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी.
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश…
गणेश चौथ पर जरूर करें चौथ माता की आरती
ॐ जय श्री चौथ मैया, बोलो जय श्री चौथ मैया,
सच्चे मन से सुमिरे, सब दुःख दूर भया.
ऊंचे पर्वत मंदिर, शोभा अति भारी,
देखत रूप मनोहर, असुरन भयकारी.
ॐ जय श्री चौथ मैया…
महासिंगार सुहावन, ऊपर छत्र फिरेए
सिंह की सवारी सोहे, कर में खड्ग धरे.
ॐ जय श्री चौथ मैया…
बाजत नौबत द्वारे, अरु मृदंग डमरु,
चौसठ जोगन नाचत, नृत्य करे भैरू.
ॐ जय श्री चौथ मैया…
बड़े बड़े बलशाली, तेरा ध्यान धरे,
ऋषि मुनि नर देवा, चरणो आन पड़े.
ॐ जय श्री चौथ मैया…
चौथ माता की आरती, जो कोई सुहागन गावे,
बढ़त सुहाग की लाली, सुख सम्पति पावे.
ॐ जय श्री चौथ मैया…




