भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, 20 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद आज सकुशल धरती पर लौट आए। उनका यान स्पेसएक्स ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया के समुद्र में सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन हुआ।शुभांशु 25 जून को एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे और 26 जून को ISS पहुंचे थे। उन्होंने अंतरिक्ष में 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें 7 प्रयोग ISRO के थे। वे अपने साथ 263 किलो वैज्ञानिक डेटा लेकर लौटे हैं, जो भविष्य के मिशनों, विशेषकर गगनयान (2027) के लिए अहम है।
पीएम मोदी बोले- यह गगनयान मिशन की दिशा में मील का पत्थर
शुभांशु की वापसी पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- ‘मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट आए हैं। उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।
मिशन की प्रमुख बातें
- शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर 18 दिन तक रहे।
- उन्होंने स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट और ड्रैगन कैप्सूल के जरिए 25 जून को केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी।
- करीब 23 घंटे की यात्रा के बाद, दोपहर 3 बजे समुद्र में लैंडिंग हुई।
- 26 जून को भारतीय समय अनुसार शाम 4:01 बजे ISS पहुंचे।
- मिशन की समाप्ति 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के समुद्र में सफल स्प्लैशडाउन के साथ हुई।
कैप्सूल की वापसी प्रक्रिया
- अंतरिक्ष यान सोमवार शाम 4:45 बजे ISS से अनडॉक हुआ।
- इसके बाद डी-ऑर्बिट बर्न की प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया।
- एंट्री के समय कैप्सूल की हीट शील्ड का तापमान 1600°C तक पहुंचा।
- 5.7 किमी की ऊंचाई पर पहला पैराशूट और 2 किमी पर दूसरा पैराशूट खुला।
- लैंडिंग से ठीक पहले नासा के साथ कम्युनिकेशन सफलतापूर्वक पुनः स्थापित हुआ।
शुभांशु शुक्ला ने ISS पर कोन- कोन से प्रयोग किए
- शुभांशु शुक्ला ने ISS पर कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें से 7 प्रयोग ISRO के थे।
- उन्होंने 263 किलो वैज्ञानिक नमूने और डेटा के साथ पृथ्वी पर वापसी की।
- भारत ने इस मिशन में भाग लेने के लिए 550 करोड़ रुपये का निवेश किया।
- यह मिशन गगनयान 2027 की तैयारी में भारत के लिए मील का पत्थर है।
घर और देश में जश्न का माहौल
शुभांशु शुक्ला के गृहनगर लखनऊ में गजब उत्साह है। शहर भर में जगह-जगह ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पोस्टर लगे हुए हैं, जिनमें उन्हें शुभकामनाएं दी गई हैं। पूरा लखनऊ शहर अपने बेटे की वापसी का इंतजार कर रहा है और शहर के लोग दुआएं कर रहे हैं। शुभांशु शुक्ला के घर को रोशनी से सजाया गया है और घर पर उत्सव जैसा माहौल है।
- लखनऊ में शुभांशु शुक्ला के घर और गृहनगर में उत्सव जैसा माहौल है।
- माता-पिता ने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में बेटे की लैंडिंग का लाइव प्रसारण देखा।
- उनके घर पर सुंदरकांड का पाठ हुआ और हनुमान मंदिर में पूजा की गई।
- हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने उनके लिए विशेष पूजा करवाई।
7 दिन आइसोलेशन में शुभांशु शुक्ला
- सभी अंतरिक्षयात्रियों को अब 7 दिन आइसोलेशन में रखा जाएगा ताकि शरीर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से सामंजस्य बना सके।
- शुभांशु शुक्ला का अमेरिका में कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य परीक्षणों से गुजरना होगा।
- इसके बाद वह भारत लौटेंगे, जहां उनका राष्ट्रीय स्तर पर अभिनंदन होने की संभावना है।
परिजनों की प्रतिक्रिया
पिता शंभु दयाल शुक्ला का बयान
शुभांशु सिर्फ हमारा नहीं, पूरे देश का बेटा है। यह मिशन इतिहास में दर्ज होगा। पूरा देश आज गर्व महसूस कर रहा है।माता आशा शुक्ला ने कहा कि हम भगवान का धन्यवाद करते हैं। बेटा सकुशल लौटा, यही सबसे बड़ी खुशी है।
41 साल बाद अंतरिक्ष में गया भारतीय
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास। 1984 में राकेश शर्मा के बाद वह अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय और ISS (अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन) पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।यह मिशन नासा-इसरो समझौते के तहत संभव हुआ। शुभांशु का अनुभव भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (2027) के लिए बेहद अहम होगा।वे एक्सिओम-4 मिशन का हिस्सा थे, जिसमें भारत ने उनकी सीट के लिए 548 करोड़ रुपए चुकाए। यह मिशन नासा, इसरो, स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस की संयुक्त साझेदारी में हुआ।





