असम के नववर्ष बोहाग बिहू के उपलक्ष्य में वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी जी ने विशेष असमिया पोशाक में दर्शन दिए। भगवान ने गले में असमिया पटका और लाल पारंपरिक वस्त्र धारण किए, जिससे उनकी छवि अद्भुत और अलौकिक नजर आई।फूल बंगला सजावट में विराजमान ठाकुर जी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। असम से आए भक्तों ने इस दिव्य स्वरूप को अविस्मरणीय बताया। बोहाग बिहू असम का प्रमुख त्योहार है, जो नववर्ष और वसंत के आगमन के साथ फसल कटाई का प्रतीक भी है।
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असम राज्य के प्रमुख पर्व बोहाग बिहू के उपलक्ष्य में वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी जी ने रविवार को विशेष असमिया पारंपरिक पोशाक धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत दिव्य और भावनात्मक था।
भगवान बांके बिहारी ने लाल रंग की असमिया पोशाक और गले में पारंपरिक असमिया पटका धारण कर जब ‘फूल बंगला’ में दर्शन दिए, तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। असमिया संस्कृति से सजे ठाकुर जी के इस अलौकिक रूप ने मंदिर परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
बोहाग बिहू, जिसे रोंगाली बिहू भी कहा जाता है, असम में नववर्ष और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। यह पर्व कृषि और प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जिसमें लोग भगवान से समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।असम के गुवाहाटी से आए श्रद्धालु आकाश गर्ग ने बताया, भगवान बांके बिहारी जी के ऐसे रूप के दर्शन पहली बार हुए। यह अनुभव अविस्मरणीय है।
बोहाग बिहू की शुरुआत गोरु बिहू से होती है, जिसमें पशुओं को स्नान कराकर हरी सब्ज़ियाँ खिलाई जाती हैं और नई रस्सियाँ पहनाई जाती हैं। यह परंपरा असम की प्रकृति और पशु प्रेम का प्रतीक है।इस विशेष अवसर पर वृंदावन में संस्कृति और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।





