हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व होता है।इस वर्ष षटतिला एकादशी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि लगभग 23 वर्षों बाद यह व्रत मकर संक्रांति के शुभ संयोग में पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन तिल का विशेष प्रयोग करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पूर्वजन्म से जुड़े दोषों से मुक्ति मिलती है।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार षटतिला एकादशी पर तिल से स्नान, तिल का दान, तिल से हवन, तिल का सेवन और तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। इन उपायों को करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।हालांकि इस साल षटतिला एकादशी की तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 13 जनवरी को मान रहे हैं, तो वहीं कुछ के अनुसार यह व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। ऐसे में सही तिथि जानना बेहद जरूरी हो जाता है।आइए आगे जानते हैं षटतिला एकादशी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त, ताकि व्रत और पूजा विधि सही समय पर संपन्न की जा सके।
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माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है. षटतिला एकादशी को हिंदू धर्म में बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है. इस साल षटतिला एकादशी आज 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन मनाई जा रही है, जिससे कि इसका महत्व कई गुणा अधिक बढ़ गया है.मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए उपाय जीवन के कष्टों को दूर करते हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।
षटतिला एकादशी 2026 तिथि और मुहूर्त
पंचांग (14 January 2026 Panchang) के अनुसार, माघ कृष्ण की एकादशी तिथि 13 जनवरी 2026 दोपहर 3:16 बजे शुरू हो चुकी है, जो 14 जनवरी 2026 को शाम 05:53 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार, षटतिल एकादशी व्रत 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. आज पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग भी रहेगा.
पूजा विधि
षटतिला एकादशी का व्रत श्रद्धालु दो तरीकों से कर सकते हैं। पहला तरीका है निर्जला व्रत, और दूसरा फलाहार या जलीय उपवास। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला व्रत केवल वही लोग करें जो पूरी तरह से स्वस्थ हों।वहीं सामान्य श्रद्धालुओं को फल, दूध या जल ग्रहण कर उपवास करने की सलाह दी जाती है, ताकि स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।शास्त्रों में षटतिला एकादशी के दिन तिल युक्त जल से स्नान, तिल से बने उबटन का प्रयोग और तिल से तैयार खाद्य पदार्थों का सेवन करने का विशेष विधान बताया गया है।मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत रखने और इन नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को पुण्य व सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
षटतिला एकादशी पर तिल का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल को अत्यंत पवित्र माना गया है। कहा जाता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई, इसी कारण इसका उपयोग पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष रूप से किया जाता है।शास्त्रों में षटतिला एकादशी के दिन तिल के प्रयोग को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से तिल का उपयोग करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, साथ ही ग्रह दोष शांत होते हैं।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, षटतिला एकादशी पर तिल से जुड़े उपाय करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और आर्थिक परेशानियां भी दूर होती हैं। यही कारण है कि इस एकादशी को दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
षटतिला एकादशी पर तिल के 6 विशेष उपाय
षटतिला एकादशी का नाम ‘षट’ और ‘तिला’ शब्दों से मिलकर बना है। यहां ‘षट’ का अर्थ है छह और ‘तिला’ यानी तिल। इसी कारण इस एकादशी पर तिल का छह अलग-अलग तरीकों से प्रयोग करना अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन उपायों से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
आइए जानते हैं षटतिला एकादशी के दिन तिल के 6 महत्वपूर्ण प्रयोग—
तिल स्नान
षटतिला एकादशी के दिन स्नान के पानी में तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।
तिल उबटन
तिल को पीसकर उबटन के रूप में शरीर पर लगाकर स्नान करें। मान्यता है कि इससे पाप कर्मों का नाश होता है और सौंदर्य व स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
तिल हवन
इस दिन हवन सामग्री में तिल मिलाकर आहुति देने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
तिल दान
गरीबों और जरूरतमंदों को तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे शनि दोष, दरिद्रता और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
तिल का सेवन
षटतिला एकादशी पर तिल से बने लड्डू, तिलकुट या भोजन में तिल का सेवन करना शुभ फलदायी माना जाता है।
तिल से तर्पण
पूर्वजों की शांति के लिए तिल से तर्पण करना चाहिए। मान्यता है कि इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।धार्मिक विश्वासों के अनुसार, षटतिला एकादशी पर इन उपायों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से जीवन की कई समस्याओं से राहत मिलती है।
व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक नगर में भगवान विष्णु की परम भक्त एक ब्राह्मणी रहती थी। वह पूरी श्रद्धा से विष्णु के व्रत किया करती थी। एक बार उसने एक महीने तक व्रत रखा, जिससे उसका शरीर कमजोर हो गया, लेकिन तन और मन शुद्ध हो गए।
भगवान विष्णु ने उसकी परीक्षा लेने के लिए उससे दान मांगा, लेकिन ब्राह्मणी ने दान में केवल मिट्टी का पिंड दिया। मृत्यु के बाद वह विष्णु लोक पहुंची, जहां उसे रहने के लिए एक खाली कुटिया मिली।
जब उसने इसका कारण पूछा, तो भगवान विष्णु ने बताया कि उसने जीवन में कभी उचित दान नहीं किया था। इसके समाधान के रूप में भगवान ने उसे षटतिला एकादशी व्रत करने की सलाह दी।व्रत को विधिपूर्वक करने से उसकी कुटिया वैभव से भर गई। शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी पर तिल का दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और दरिद्रता दूर होती है।





