वृंदावन के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर में रविवार को भगवान रंगनाथ का अन्नकूट महोत्सव बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाया गया। भगवान ने गिरिराजधारी स्वरूप में दर्शन देकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित इस विशाल मंदिर में हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पंचमी पर अन्नकूट उत्सव मनाने की परंपरा है।सुबह से ही पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान की आराधना की और आरती के बाद सोने-चांदी के थालों में सजाए गए विविध व्यंजन भगवान को अर्पित किए। इस दौरान मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े।मंदिर के पुरोहित विजय मिश्र ने बताया कि भगवान गोदा रंगमन्नार राधा-कृष्ण के ही स्वरूप हैं, इसलिए यहां अन्नकूट उत्सव विशेष महत्व रखता है। गाय के गोबर से गिरिराज जी का स्वरूप बनाया गया और 251 किलो चावल से तैयार अन्नकूट भगवान को अर्पित किया गया। पूजा के बाद प्रसाद का वितरण किया गया. पूरा मंदिर परिसर “राधे-राधे” और “रंगनाथ भगवान की जय” के जयकारों से गूंज उठा।
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वृंदावन के श्री रंगनाथ मंदिर में रविवार को भगवान रंगनाथ का अन्नकूट महोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान रंगनाथ ने गिरि गोवर्धन धारी स्वरूप में दर्शन दिए और बांसुरीधारी भगवान गोदा रंगमन्नार को अन्नकूट प्रसाद अर्पित किया। दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी।
मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर अन्नकूट महोत्सव की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सुबह से ही पुजारियों और सेवायतों ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया। करीब 1 बजे धूर गोले की आवाज के साथ दर्शन शुरू हुए और मंदिर में भगवान की जयकार गूंजी।
पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ आराधना और कुंभ आरती की। अन्नकूट प्रसाद सोने-चांदी के थालियों में सजाया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन शामिल थे। 251 किलो चावल से गिर्राज जी बनाए गए, जबकि स्वर्ण स्तंभ के पास गाय के गोबर से भी गिर्राज जी का स्वरूप तैयार किया गया।
मंदिर के पुरोहित विजय मिश्र ने बताया कि ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का विशेष महत्व है। भगवान गोदा रंगमन्नार राधा-कृष्ण के स्वरूप हैं, इसलिए इस दक्षिण भारतीय शैली के मंदिर में यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। महोत्सव के बाद प्रसाद का मिश्रण कर भक्तों में वितरित किया गया, जिससे श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह देखते ही बन रहा था।





