हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है। परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 14 सितम्बर दिन शनिवार यानी आज रखा जाएगा. परिवर्तिनी एकादशी व्रत करने वाले हर व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही परिवर्तिनी एकदाशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के जीवन की सभी पाप कट जाते हैं और सुखों की प्राप्ति होती है। चलिए जानते हैं कैसे करते हैं? भाद्रपद मास की एकादशी यानी परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि, मुहूर्त और महिमा।
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हर माह में एकादशी व्रत एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में पड़ता है. हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। भाद्रपद शुक्ल एकादशी का नाम परिवर्तिनी है। उसके सुनने मात्र से हजारों अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. साथ ही सभी शुभ फल की प्राप्ति होती है, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

आज 14 सितंबर 2024, दिन शनिवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसपर भगवान विष्णु के निमित्त परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। साथ ही आज सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। वहीं अशुभ माने जाने वाले भद्रा का भी निर्माण हो रहा है।
इस दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, उत्तराषाढा नक्षत्र, शोभन योग, वणिज करण, पूर्व का दिशाशूल और मकर राशि का चंद्रमा है. परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. जो भी इस व्रत को रखकर वामन भगवान की पूजा करते हैं. भगवान उसे प्रसन्न होकर सभी संकटों को दूर कर देते हैं और और इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. जो लोग परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा सुनते हैं, उसे हजारों अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर पुण्य मिलता है. यह भाद्रपद का अंतिम और सितंबर का पहला एकादशी व्रत होगा. परिवर्तिनी एकादशी के दिन भद्रा भी है, हालांकि भद्रा का वास पाताल में है. भगवान विष्णु की पूजा सुबह में 06:06 बजे से कर सकते हैं. व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद होगा.

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि एवं व्रत कैसे करना चाहिए ?
सबसे पहले सुबह में स्नान आदि करके सूर्य देव को जल चढ़ाएं. फिर हाथ में जल और पुष्प लेकर परिवर्तिनी एकादशी व्रत और पूजा का संकल्प करें. उसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान वामन या फिर श्रीहरि विष्णु की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना करें. उनको गंगाजल, पंचामृत आदि से स्नान कराएं. देसी घी का दीपक जलाकर धनिया की पंजीरी, पंचामृत, पीले फल और मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन आप जरूरतमंद लोगों को भोजन व दान दक्षिणा भी देनी चाहिए. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं.
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा के दौरान इन मंत्रों करना चाहिए जाप
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा के दौरान कृष्ण महामंत्र का जाप करें. “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करते हुए दिन बिताएं। शनिवार के दिन पड़ रही परिवर्तिनी एकादशी के दिन शनिदेव की पूजा जरूर करें। पूजा के दौरान शनिदेव का सरसों के तेल से अभिषेक करें। इसके बाद शनिदेव को नीले फूल, काले तिल, काली उड़द की दाल अर्पित करें। अब शनि मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नम: का जाप करें।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत के नियम यहां जानें
परिवर्तिनी एकादशी पर अनाज, दालें, चावल, प्याज और मांसाहारी भोजन खाना सभी के लिए सख्त वर्जित है। यात्रा दशमी से शुरू होती है और पर्यवेक्षक को दोपहर से पहले केवल ‘सात्विक’ भोजन खाना चाहिए। पूजा विधि का पालन करते हुए भगवान श्रीधर की पूजा करनी चाहिए। जो भक्त एकादशी के दिन एक समय भोजन करके व्रत रखते हैं, उनके लिए एकादशी के दिन फलियाँ और अनाज खाना वर्जित है। इस दिन बाल, नाखून, और दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए . एकादशी के दिन ब्राह्मणों को दान अवश्य करें. एकादशी व्रत के पारण करने के बाद अन्न का दान करना शुभ माना गया है.
एकादशी व्रत में क्या फलाहार करना चाहिए?।
अगर आप एकादशी व्रत रख रहे हैं, तो व्रत के दौरान आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता आदि चीजें एकादशी फलाहार में ग्रहण करना चाहिए। एकादशी व्रत के दिन फलाहार में कुट्टू का आटा और साबूदाना का सेवन भी कर सकते हैं। फलाहार वाली चीजों का पहले विष्णु जी को भोग लगाएं उसमें तुलसी दल जरूर रखें। इसके बाद ही फलाहार ग्रहण करना चाहिए।
परिवर्तिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
परिवर्तिनी एकादशी 2024 शुभ मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 14 सितंबर 2024 को रात 08 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। ऐसे में परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का मुहूर्त सुबह 07:38 से सुबह 09:11 तक है।
परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा
युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। तब भगवान श्री कृष्ण कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाली, उत्तम वामन एकादशी का माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ तुम ध्यानपूर्वक सुनो।
यह एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। अत: मोक्ष की इच्छा करने वाले मनुष्य इस व्रत को अवश्य करें।
जो कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।
भगवान के वचन सुनकर युधिष्ठिर बोले कि भगवान! मुझे अतिसंदेह हो रहा है कि आप किस प्रकार सोते और करवट लेते हैं तथा किस तरह राजा बलि बलि को बाँधा और वामन रूप रखकर क्या-क्या लीलाएँ कीं? चातुर्मास के व्रत की क्या विधि है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्तव्य है। सो आप मुझसे विस्तार से बताइए।
श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! अब आप सब पापों को नष्ट करने वाली कथा का श्रवण करें। त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था। वह मेरा परम भक्त था। विविध प्रकार के वेद सूक्तों से मेरा पूजन किया करता था और नित्य ही ब्राह्मणों का पूजन तथा यज्ञ के आयोजन करता था, लेकिन इंद्र से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया।
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