Chaitra Navratri Ashtami Puja: महाष्टमी पर मां महागौरी की करें पूजा, यहां जानें प्रिय भोग, आरती, और मंत्र।

Chaitra Navratri Ashtami Puja: महाष्टमी पर मां महागौरी की करें पूजा

नवरात्रि 2026 दिन 8 की शुभकामनाएं : चैत्र नवरात्रि उत्सव में देवी दुर्गा की नौ दिवसीय पूजा 20 मार्च को शुरू हो चुकी है और 27 मार्च 2026 तक चलेगी.इस बार चैत्र नवरात्रि पूरे नौ दिनों की हो रही है। यह सुख-समृद्धि और सौभाग्य का संकेत देती है, जिससे माता के आशीर्वाद से सभी कार्य सफल होते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और दिव्य बताया गया है। भक्तों का विश्वास है कि विधि-विधान से मां महागौरी की पूजा करने पर जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

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26 मार्च को चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि मनाई जा रही है, जिसे दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, और अष्टमी का दिन देवी के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित होता है। दुर्गा अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन मां महागौरी को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप, विशेष भोग अर्पित करना और शुभ रंगों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही, मां महागौरी की कथा का श्रवण भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

 नवरात्रि के शुभ अवसर पर आज महाष्टमी का दिन है, जिसे मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित किया जाता है। देशभर में श्रद्धालु आज पूरी आस्था और भक्ति के साथ मां महागौरी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।मां महागौरी को शक्ति, सौंदर्य और करुणा की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें यह गौरवर्ण प्राप्त हुआ। इसी कारण उन्हें ‘महागौरी’ कहा गया। उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल, शांत और सौम्य है। कहा जाता है कि उनकी आयु मात्र आठ वर्ष की मानी जाती है और वे श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं।

आज के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। भक्तजन नौ कन्याओं को देवी के नौ रूप मानकर उनका पूजन करते हैं और भोजन कराते हैं। साथ ही, कई परिवारों में कुलदेवी के रूप में भी मां महागौरी की आराधना की जाती है।मान्यता है कि मां महागौरी अपने भक्तों के समस्त दुखों का नाश करती हैं और उन्हें सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि महाष्टमी का दिन श्रद्धा, भक्ति और विशेष पूजन विधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्रि के आठवें दिन का रंग 

आठवें दिन गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है. यह रंग प्रेम और करुणा का प्रतीक है.

मां महागौरी की पूजन विधि

नवरात्रि के आठवें दिन देवी दुर्गा के साधक को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए. इसके बाद साधक को मां महागौरी के व्रत और पूजन का संकल्प करना चाहिए. फिर घर के ईशान कोण में देवी का चित्र या मूर्ति रखकर उसे पवित्र जल से स्नान कराना चाहिए. इसके बाद माता को सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए. फिर देवी को धूप-दीप, चंदल-रोली, फल-मिठाई आदि अर्पित करते हुए माता के मंत्र का जप और उनके स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. 

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मां महागौरी का मंत्र | Maa Mahagauri Mantra

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.

पूजा विधि

अगर आप मां महागौरी की पूजा करना चाहते हैं तो अष्टमी के दिन सुबह स्नान करें. फिर, उन्हें सफेद फूल चढ़ाकर, हलवा, पूरी, सब्जी, चने और नारियल का भोग लगा कर उनकी पूजा करें. पूजन के बाद कन्याओं को भोजन करवाना व्रत का विशेष भाग है और इसे शुभ माना जाता है.

महाष्टमी पर मां महागौरी की कथा

आज चैत्र  नवरात्रि का आठवां दिन है और इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस मौके पर श्रद्धालु मां की कथा को सुनते और याद करते हैं, जो तपस्या, त्याग और सौंदर्य की मिसाल मानी जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवी सती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप में लीन थीं, तब उनके शरीर पर धूल और मिट्टी की मोटी परत जम गई थी। वर्षों की तपस्या के बाद जब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया, तब देवी सती ने गंगाजल से स्नान किया। स्नान के पश्चात उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और गोरा हो गया।

देवी के इसी गौरवर्ण और दिव्य सौंदर्य को देखकर भगवान शिव ने उन्हें ‘महागौरी’ नाम दिया। तभी से देवी दुर्गा के इस स्वरूप को महागौरी के नाम से पूजा जाने लगा।

माना जाता है कि मां महागौरी अपने भक्तों के सभी पापों को हर लेती हैं और उन्हें सुख, शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। उनके दर्शन मात्र से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

आज महाष्टमी पर देशभर में मां महागौरी की विशेष पूजा अर्चना की जा रही है, और उनके तेजस्वी स्वरूप की कथा भक्तों के बीच श्रद्धा के साथ सुनाई जा रही है।

शीघ्र विवाह के लिए उपाय

चैत्र शुक्ल अष्टमी की रात एक विशेष उपाय जरूर करें. इस दिन पूजा के दौरान मां महागौरी को एक चांदी का सिक्का अर्पित करें. इसके बाद ‘हे गौरीशंकर अर्धांगी, यथा त्वां शंकर प्रिया. तथा माम कुरु कल्याणी, कान्तकांता सुदुर्लभाम’ मंत्र का 3 या 11 माला जाप करें. मंत्र जाप के बाद मां महागौरी से शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें और उस चांदी के सिक्के को पीले कपड़े में बांधकर अपने पास रख लें.

मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया।

जया उमा भवानी जय महामाया।।

हरिद्वार कनखल के पासा।

महागौरी तेरा वहां निवासा।।

चंद्रकली और ममता अंबे।

जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।

भीमा देवी विमला माता।

कौशिकी देवी जग विख्याता।।

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।

सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।

उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।

तभी मां ने महागौरी नाम पाया।

शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।

मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।

महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।

नवरात्रि मा भगवती के नौ स्वरूप
नवरात्रि मा भगवती के नौ स्वरूप

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