ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आज अपरा एकादशी के रूप में मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और यह भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना को समर्पित होता है। प्रत्येक माह में दो एकादशी पड़ती हैं- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास और विष्णुजी की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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आज 13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी तिथि को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए समर्पित होता है। वर्षभर में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं, जिनमें अपरा एकादशी का खास महत्व बताया गया है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को सौ गायों के दान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।
जानें कब है अपरा एकादशी?
ज्योतिष गणना के अनुसार एकादशी व्रत उदया तिथि के आधार पर रखा जाता है। इसी कारण वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत आज, 13 मई को किया जा रहा है। पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट पर हुई थी, जबकि इसका समापन आज 13 मई को दोपहर 1 बजकर 29 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व माना जाता है।
अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 8 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक है.
- विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से 3 बजकर 27 मिनट तक है.
- गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगा.
- अमृत काल शाम 7 बजकर 41 मिनट से 9 बजकर 13 मिनट तक है.
- निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 56 मिनट से देर रात 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
अपरा एकादशी पूजन विधि
- संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद व्रत का संकल्प लें और घर के मंदिर की सफाई करें।
- स्थापना: चौकी पर भगवान विष्णु (या लड्डू गोपाल जी) की प्रतिमा स्थापित कर पीले आसन पर बैठाएं।
- पूजन: विष्णु जी को हल्दी/चंदन का तिलक लगाएं, पीले फूल, तुलसी के पत्ते, फल और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।
- दीपक: देसी घी का दीपक जलाएं और भगवान को तिल जरूर चढ़ाएं।
- कथा व आरती: अपरा एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में कपूर से भगवान विष्णु की आरती करें।
- मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र या ‘ॐ श्री केशवाय नमः’ का जप करें
अपरा एकादशी मुहूर्त और पारण समय
पूजा मुहूर्त – सुबह 5.32 से सुबह 8.55 तक शुभ मुहूर्त, अपरा एकादशी का व्रत पारण 14 मई 2026 को सुबह 5.31 से सुबह 8.14 तक रहेगा. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय सुबह 11:20 है.
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे आरती
ॐ जय जगदीश हरे…
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे…
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे…
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
अपरा एकादशी व्रत कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार प्राचीन समय में महीध्वज नाम के एक धर्मात्मा राजा थे, जबकि उनका छोटा भाई वज्रध्वज अत्यंत क्रूर स्वभाव का था। ईर्ष्या और द्वेष के कारण उसने एक रात राजा महीध्वज की हत्या कर दी और उनके शरीर को पीपल के पेड़ के नीचे दबा दिया। अकाल मृत्यु होने की वजह से राजा की आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगी और उस स्थान पर लोगों को परेशान करने लगी।
बताया जाता है कि एक दिन धौम्य ऋषि वहां से गुजरे। उन्होंने अपने तपोबल से पूरी घटना का ज्ञान प्राप्त किया और प्रेतात्मा को मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। ऋषि ने विधिपूर्वक अपरा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा महीध्वज को समर्पित कर दिया। व्रत के प्रभाव से राजा को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई और वह दिव्य विमान में बैठकर स्वर्ग लोक को प्रस्थान कर गए। धार्मिक मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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