हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्त्व है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत हर मास दो बार किया जाता है.कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। इस बार एकादशी का व्रत 21 जून को यानी आज रखा जा रहा है. मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है।हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत-पूजन करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। यह व्रत न केवल धर्म और पुण्य का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना जाता है।योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा, नियम और विधिपूर्वक करने पर विशेष फलदायी माना गया है.
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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह में दो बार- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। इस प्रकार पूरे वर्ष कुल 24 एकादशियां होती हैं, जबकि अधिकमास पड़ने पर इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे योगिनी एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष 21 जून 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को समर्पित यह एकादशी व्रत मोक्षदायिनी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों का नाश होता है और व्रती को जीवन में सुख, वैभव और विष्णु कृपा प्राप्त होती है।

आइए जानते हैं जून महीने में कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत, क्या है पूजा की विधि और कौन से उपाय दिलाएंगे आपको समस्याओं से मुक्ति. यहां जानें-
योगिनी एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त
तिथि और समय
योगिनी एकादशी की तिथि 21 जून 2025 को सुबह 7:19 बजे प्रारंभ होगी और 22 जून को सुबह 4:28 बजे तक रहेगी। चूंकि उदया तिथि (उगते सूरज के समय की तिथि) को ही व्रत रखने की परंपरा है, इसलिए व्रत 21 जून को ही रखा जाएगा।
पूजन का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:04 बजे से 4:44 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:55 बजे से 12:51 बजे तक
इन मुहूर्तों में पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से भगवान विष्णु का ध्यान, व्रत कथा का पाठ और मंत्र जाप इस दौरान किए जाते हैं।

योगिनी एकादशी 2025 व्रत पारण समय
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करना चाहिए। आप आषाढ़ एकादशी का पारण 22 जून को दोपहर 01 बजकर 47 मिनट से 04 बजकर 35 मिनट तक पारण कर सकते हैं.
योगिनी एकादशी के दिन इन मंत्रों का करना चाहिए जाप
योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जप करें:
मुख्य मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (108 बार माला जप)
स्नान मंत्र: “गंगा च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलस्मिन् सन्निधिं कुरु”
विष्णु मंत्र: “ॐ नमो नारायणाय” या “हरे कृष्ण हरे राम
इन मंत्रों का जप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करें। विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ भी करें।
पूजा विधि
- व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को पीले फूल, तुलसी पत्र, पंचामृत, मिठाई, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें।
- इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करने की परंपरा है, जिससे पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ता है।





